https://draft.blogger.com/blog/post/edit/6545147327727652889/6549976125047528414 " किसी अनजान पर जल्दी भरोसा करना ठीक नहीं

किसी अनजान पर जल्दी भरोसा करना ठीक नहीं








किसी अनजान पर जल्दी भरोसा करना ठीक नहीं  




    बहुत दिनों की बात है , एक जंगल में एक हाथी रहता था उसका नाम मोहन था| शरीर से सबसे बड़ा होने के कारण उसका जंगल के पशु - पक्षियों में बहुत रौब था|  जब भी मोहन हाथी को भूख लगती तो वह अपनी सूंड से पेड़ों की टहनियाँ तोड़ता और मजे से उनके हरे -हरे पत्ते खा कर अपना पेट भरता |  उसी जंगल में बहुत से भेड़िये रहते थे उनको यह सब अच्छा नहीं लगता था |  

      इसके बावजूद जंगल के बाकी सभी प्राणी मोहन हाथी की बहुत इज़्जत करते थे क्योंकि वह भी किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता था जंगल के सभी वन्य प्राणी उसके अच्छे सवभाव के कारण बड़े प्रसनचित रहते केवल भेड़ियों को छोड़कर| भेड़ियों को मोहन हाथी से बहुत चिढ़ थी की वह कितने मजे से अपनी जिन्दगी जी रहा है|  





      मोहन हाथी से सभी वन्य प्राणी बहुत प्यार करते थे और सब उसकी बात मानते थे सिर्फ भेड़ियों की जाति को छोड़कर , " क्योंकि सारे भेड़िये उस से बहुत नफरत करते थे |"

       एकदिन भेड़ियों ने मिलकर उस हाथी को मारने की योजना बनाई | उसका इतना बड़ा शरीर है , "उसे मार कर उसका मांश हम काफी दिनों तक खा सकते हैं |" लेकिन उसको मारना बच्चों का खेल नहीं है सब ने मिलकर कहा| तभी उनमें से एक भेड़िये ने हिम्मत दिखाई और कहा , " मैं उसे अपनी बुद्धि से मार सकता हूँ | "   

      वह मोहन हाथी के पास गया और उसे प्रणाम किया | मोहन हाथी ने पूछा , "भाई | तुम कौन हो ? और कँहा से आये हो ?" मैंने तुम्हे पहले कभी नहीं देखा है | तब भेड़िये ने कहा कि , " महाराज | मुझे जंगल के सभी प्राणियों ने अपना दूत बनाकर आपके पास भेजा है | 

       सभी वन्य प्राणी चाहते हैं कि , "अपने जंगल का भी कोई राजा होना चाहिए, क्योंकि अभी कोई राजा नहीं है | और हम सब ने मिलकर सोच विचार किया कि आप जैसे बलवान को ही जंगल का राजा बनाना चाहिए | इसलिए उन सबने मुझे अपना दूत बनाकर आपके पास भेजा है , आपको यह खबर देने के लिए |  


       इसलिए महाराज आपको मेरे साथ साथ चलना है , " क्योंकि वंहा पर सभी वन्य प्राणी अपने होने वाले राजा का इन्तजार कर रहे है | यह सुनकर मोहन हाथी बहुत खुस हुआ और उस भेड़िये के साथ चल दिया | भेड़िये ने रस्ते में उसे कहा, " मुहर्त  का समय नजदीक आ रहा है हमें जरा जल्दी चलना होगा |" 






        भेड़िया तेजी से भागने लगा और उसके पीछे - पीछे मोहन हाथी भी दौड़ने लगा| रास्ते में एक तालाब आया | उस तालाब में ऊपर -ऊपर पानी दीखता था लेकिन नीचे पूरी दलदल थी| भेड़िया छोटा होने के कारन कूद कर तालाब को पार कर गया , लेकिन हाथी अपना भारी सरीर लेकर दलदल में फास्ट चला गया |    

       बाहर न निकल पाने के कारण वह भेड़िये को आवाज लगाने लगा , "अरे | दोस्त, मेरी मदद करो| लेकिन भेड़िये का जबाव तो अलग ही था " अरे मुर्ख | मुझ जैसे भेड़िये पर तुमने कैसे यकीन कर लिया | मैंने तुझे मुर्ख बनाया है और अभी हमारी सारी बिरादरी मिलकर तुम्हारा शिकार करेगी | अब तुम हमारा कुछ भी नहीं बिगाड़ सकते , समझे तुम मुर्ख हाथी |

         तब मोहन हाथी को अपने आप पर बहुत क्रोध आया और गुस्सा भी , कि क्यों उसने जल्दबाजी में निर्णय लिया |  लेकिन अब मोहन हाथी समझ चूका था कि अब बहुत देर हो चुकी है और उसे कोई भी बचा नहीं पायेगा |

           अब भुगतो और अपनी मौत की घड़ियाँ गिनती करो | लेकिन उसी तालाब में एक मगरमच्छ भी रहता था , उसने जैसे ही मोहन हाथी की दर्द भरी आवाज सुनी तो वह उसकी और भागा और उसने थोड़ी सी देर में तालाब के सभी कछुओं और मछलियों को इकठा कर लिया और जंगल से भी मोहन हाथी की आवाज सुनकर दौड़े चले आये और सबने मिलकर मोहन हाथी को उस तालाब से बाहर निकाल लिया | जब कुछ देर बाद वंहा पर सारे भेड़िये आ गए तब उनको बहुत बड़ा झटका लगा की उसको मोहन हाथी को बाहर किसने निकाला , " क्योंकि मोहन हाथी अब उनके चंगुल से बाहर हो चूका था |"  


       इसीलिये साथियो बड़े बजुर्गों ने कहा है कि, "कभी भी बिना जान - पहचान जल्दी से (तुरन्त) किसी पर भरोसा नहीं करना चाहिए|"  अगर मोहन हाथी भी थोड़ा दिमाग से काम लेता और उसी समय भेड़िये के साथ ना जाता तो वह ना ही दलदल में फसता और न ही अपनी जान से जाता|read more.....

       इस कहानी से हमें यह सीख(ज्ञान) मिलती है की कभी भी बिना जान पहचान के किसी पर भरोसा नहीं करना चाहिए |

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ