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संघर्ष एक गरीब बच्चे का













लेखक: Darshan Lal 
श्रेणी:    एक 
27  
समय: Aug 06, 2020
         

संघर्ष एक गरीब बच्चे का 


 दोस्तों | आइये मैं  अवगत कराता हूँ एक ऐसे बच्चे से जिसने बचपन में ही सीख़ लिया था कि वह एक गरीब परिवार में पैदा हुआ है और अब उसको बहुत मेहनत करनी है अपने आप को कुछ अच्छा बनने के लिए | तो चलिए दोस्तों अब कहानी शुरू करते हैं ताकि आपको पढ़कर अच्छा लगे | 

         भारत के हरियाणा राज्य के जिला कुरुक्षेत्र में शाहाबाद मारकंडा सहर के पास एक गांव है जो की उस सहर से लगभग ५ से ६ किलोमीटर पड़ता है बात उन दिनों की है जब देश को आज़ाद हुए कुछ ही समय हुआ था | गांव का नाम यारी था वंहा पर एक नम्बरदार नाम से एक किसान रहता था उसके दो बेटे और चार बेटियां थी धीरे -2 करके वह नम्बरदार अपने बच्चों की शादियां कर देता है सिर्फ एक बेटा और एक बेटी बिना शादी के रह जाते है क्योंकि वह अभी थोड़ा छोटे थे उनका बड़ा लड़का जिसकी शादी हो चुकी है और अब अपने माता -पिता से अलग रहता है उस परिवार की कहानी को आप पढ़ रहे हैं | एक तो परिवार गरीब है न कोई जमीन जायदाद है और न ही किसी प्रकार की कोई और प्रॉपर्टी या पैसा इत्यादि |   


    उनके परिवार में वे दो पति -पत्नी छः लड़के और पांच लड़कियां जिसमें से एक लड़की बीमारी के कारण स्वर्ग सिधार जाती है बाकि उनके पास १० बच्चे मौजूद है |  सबसे बड़े लड़के को 7 -8 साल की उम्र में यह समझ में आ जाता है की अब जल्दी ही उसको भी मेहनत करनी पड़ेगी जिंदगी जीने के लिए | क्योंकि घर का गुजारा बहुत मुश्किल से चलता था | 

    तब वह लड़का अपने स्कूल टाइम के बाद मजदूरी करता और जिस दिन उसके स्कूल की छुटी होती तो उस दिन वो मजदूरी करके पैसे कमाता और अपनी माँ को दे देता था ताकि घर में जो सामान की जरुरत है वह ली जा सके |  सब्जी खाने के लिए वह कोल्ड स्टोर के बाहर जो छँटा हुआ प्याज और आलू फ़ेंक देते उस में से अच्छे -2 निकाल कर आधे घर ले आता और आधे सब्जी मंडी में बेच देता | 

        लड़का थोड़ा और बड़ा हुआ तो उसने अपने छोटे भाई और दो छोटी बहनों को साथ लेकर जमींदारों की फसल कटनी शुरू कर दी | सबसे पहले उसने जो एक एकड़ जमीन से फसल काटी उस का मेहनताना उनको एक किवंटल अनाज मिला |  यह देख कर लड़के की हिमत बढ़ गई और उसने और ज्यादा जोश से फसल काटनी शुरू की जिसके बदले में उनको अच्छा खासा अनाज मिला जिसमे से उन्होंने साल भर के खाने के लिए रखली और बाकि का बचा हुआ अनाज मंडी में बेच दिया जिससे उनको काफी सारे पैसे मिले | 


           वह लड़का काम से कभी जी नहीं चुराता था काम कोई भी हो बस उसको पैसे मिलने चाहिए वह अपने स्कूल टाइम के हिसाब से काम कर देता था उसके काम से सभी जमींदार बहुत खुश थे की लड़का मेहनती है और अच्छा काम करता है | यह देखकर की लड़का अच्छा काम करता है गांव के बहुत सरे जमींदार उस लड़के से काम कराने के लिए तत्पर रहते थे | continuous reading

गांव में भी सब लोग उसको बहुत अच्छी नजरों से देखते क्योंकि वह फालतू में किसी के घर जाना पसंद नहीं करता था | 



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