google.com, pub-4122156889699916, DIRECT, f08c47fec0942fa0

नारी जीवन के फैसले बहुत कठिन होते हैं ?



नारी जीवन के फैसले बहुत कठिन होते हैं ?




 आज के दौर में भी लड़के को ज्यादा महत्व दिया जाता है जबकि दूसरी तरफ अगर लड़कियों की बात करूँ तो वह भी किसी क्षेत्र में लड़कों से पीछे नहीं है समाज में आज भी धर्म के ठेकेदार मौजूद हैं जो हमें इस विडिंबना से हमें बाहर नहीं निकलने देते | उत्तर प्रदेश के जिला कानपूर के किसी कस्बे में एक परिवार रहता था घर में तीन संतान जो लड़कियाँ पहले से हैं चौथी सन्तान भी लड़की पैदा हो गई|  घर में सब लोग मायूश हो गए सभी यह सोच रहे थे कि इस बार तो घर में लड़का ही पैदा होगा | 

नारी जीवन के फैसले बहुत कठिन



उस नन्ही बच्ची से कोई ठीक से बर्ताव भी नहीं करता प्यार - दुलार तो बहुत दूर की बात थी सिवाय उसकी अपनी माँ के |  परिवार का कोई भी सदस्य उसे देखता तक नहीं था उस नन्ही परी का नाम उसकी माँ ज्योति ने विशु रखा |  दो वर्ष तक तो उसकी माँ ज्योति ने पूरा ध्यान दिया मगर दो वर्ष बाद उसके भाई का जन्म हुआ | तब परिवार में तो उसको देखता तक नहीं था उसकी माँ ज्योति ने भी उसपर ध्यान रखना कम कर दिया | 

उनके पड़ोस में एक विमला नाम की महिला रहती थी उसके पास अपनी कोई सन्तान नहीं थी जो रिश्ते में विशु की आंटी लगती थी, इसलिए विमला विशु को बहुत प्यार करती थी|  विशु अपने भाई को बहुत प्यार करती थी घर में परिवार के सभी लोग उसके भाई की सभी फरमाईश पूरी करते मगर जब वो कुछ कहती तो कोई नहीं सुनता | बच्ची विशु छोटी होने के कारण समझ नहीं पाती कि उसके साथ ऐसा क्यों हो रहा है | 


 वर्ष बीतते गए और बच्चे बड़े हो गए | विशु कक्षा दस में पढ़ रही थी उसके पापा ने उसकी ट्यूशन तक नहीं लगवाई | विशु ने  घर पर परीक्षा की पूरी तैयारी की और पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया | सरकार की तरफ से स्कॉलरशिप जिसे कई लोग वजीफा के नाम से भी जानते हैं मिलने लग गई |  विशु ने इसी तरह बाहरवीं कक्षा में भी पूरे राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया |  विशु आगे पढ़ना चाहती थी , मगर परिवार वालों ने उसकी शादी कर दी |  विमला आंटी के कहने पर विशु के ससुर ने उसका एडमिशन कॉलेज में करवा दिया | लेकिन कुछ समय के बाद विशु के ससुर का भी स्वर्गवास हो गया | विशु की आँखों के आगे अंधकार छा गया,  क्योंकि उसकी सास और पति पहले से ही नहीं चाहते थे कि विशु कॉलेज जाए |  


विशु का बी एस सी का आखरी साल था वह बी एड करके अध्यापिका बनना चाहती थी , लेकिन पति और सास के दबाव में उसको कॉलेज छोड़ना पड़ा|  अलबत्ता कॉलेज के प्राध्यापक और प्रिंसिपल के समझाने पर उसकी सास उसे परीक्षा दिलवाने को राजी हो गई , विशु ने यंहा भी पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल किया |  इसके बावजूद विशु को ससुराल वालों के सामने घुटने टेकने पड़े | 

कुछ समय के बाद विशु ने दो जुड़वाँ लड़कियों को जन्म दिया | पति और सास के दबाव में वह ना चाहते हुए भी दूसरी बार गर्भवती हुई | सास और पति ने सोनोग्राफी टेस्ट करवाया |  जाँच में पता चला कि विशु के गर्भ में बेटी है , तो उसपर दबाव बनने लगा गर्भपात करवाने के लिए |  अबतक सहती आई विशु ने विद्रोह कर दिया | जब उसे जबरदस्ती गर्भपात करवाने के लिए हॉस्पिटल ले जाया जा रहा था , तभी वह रेलवे स्टेशन पर बहाने से दोनों बेटियों के साथ चंडीगढ़ जाने वाली रेलगाड़ी में बैठ गई | उसके बाद उसने अपनी सहेली बात की, जो पेशे से एक वकील थी | उसने कहा , " कि तुम कुछ दिनों के लिए अपनी के साथ मेरे घर पर आ जा |" फिर कुछ करते है | 

नारी जीवन के फैसले बहुत कठिन




कुछ दिनों के बाद विशु ने वंही से अपने पति को तलाक के पेपर भेजकर तलाक ले लिया |  डिलीवरी का समय पूरा होने पर विशु ने  प्यारी गुड़िया को जन्म दिया |  उसने वंही पर एक स्कूल में टीचर की नौकरी कर ली और अपनी तीनों लड़कियों को उच्च शिक्षा दिलवाई |  आज उसकी तीनों बेटियाँ सरकारी अफसर हैं लोग उसे बेटियों की माँ के रूप में जानते हैं | वह बहुत खुश होती है तब फिर सोचती है ," काश ! उसकी सास और पति ने बेटियों को अपना माना होता तो आज सबकी जिन्दगी कितनी खुशहाल होती | " अब उसने अपना एक छोटा सा स्कूल भी खोल लिया  जिसमे वह सिर्फ लड़कियों को ही पढ़ाती है | 

दोस्तों ! इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि लड़की और लड़के में भेद - भाव नहीं करना चाहिए और हमें अपनी बेटियों को भी वो अधिकार देने चाहिए जिनसे उन्हें आजतक वंचित रखा गया | 



Tags   #नारी  #शक्ति  #जीवन #फैसला #मुश्किल 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ